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नल एवं दमयन्तीके पूर्वजन्मकी कथा तथा शिवावतार यतीश्वरका हंसरूप धारण करना

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शिव पुराण  शतरुद्रसंहिता अट्ठाईसव अध्याय नल एवं दमयन्तीके पूर्वजन्मकी कथा तथा शिवावतार यतीश्वरका हंसरूप धारण करना नन्दीश्वर बोले- हे प्राज्ञ! हे मुने! अब मैं परमात्मा शिवके परम आनन्दप्रद यतिनाथ नामक अवतारका वर्णन करूँगा, आप सुनें ॥ १ ॥  हे मुनीश्वर! [पूर्वकालमें] अर्बुदाचल नामक पर्वतके समीप भिल्लवंशमें उत्पन्न आहुक नामक एक भील रहता था ॥ २॥ उसकी पत्नीका नाम आहुका था, जो अत्यन्त पतिव्रता थी। वे दोनों प्रतिदिन भक्तिपूर्वक शिवजीकी पूजा करते थे। वे दोनों महाशिवभक्त थे ॥ ३ ॥ हे मुने! किसी समय सदा शिवभक्तिमें तत्पर रहनेवाला वह भील अपने तथा स्त्रीके लिये आहारकी व्यवस्थाहेतु बहुत दूर चला गया ॥ ४ ॥ इसी बीच शिवजी संन्यासीका रूप धारणकर उसकी परीक्षा लेनेके लिये सायंकाल उस भीलके घर आये ॥ ५ ॥ उसी समय वह गृहपति [आहुक] भी वहाँ आ गया और उस महाबुद्धिमान् भीलने प्रेमपूर्वक उन यतीश्वरकी पूजा की ॥ ६॥ उसके भावकी परीक्षा करनेके लिये महालीला करनेवाले संन्यासीरूपधारी उन शिवजीने डरते हुए प्रेमपूर्वक दीनवचन कहा- ॥७॥  यतिनाथ बोले- हे भिल्ल! तुम मुझे आज रहनेके लिये स्थान दो और प्रातःकाल हो...