होलिका दहन अन्य भुज टोटके
'होलिका दहन मुहूर्त' 17 मार्च को 18:33 से 20:58 'होलिका' में दहन करें अपने कष्ट होली के आयोजन में अग्नि प्रज्ज्वलित कर वायुमंडल से संक्रामक कीटाणुओं को दूर करने का प्रयास होता है। इस दहन में वातावरण शुद्धि हेतु हवन सामग्री के अलावा गूलर की लकड़ी, गोबर के उपले, नारियल, अधपके अन्न आदि के अलावा बहुत- सी अन्य निरोधात्मक सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जिससे आने वाले रोगों के कीटाणु मर जाते हैं। जब लोग उच्च ताप वाली होलिका के गिर्द परिक्रमा करते हैं तो उनमें रोगोत्पादक जीवाणुओं को समाप्त करने की प्रतिरोधात्मक क्षमता में वृद्धि होती है और वे कई रोगों से बच जाते है। ऐसी दूरदृष्टि भारत के हर पर्व में विद्यमान है जिसे समझने और समझाने की आवश्यकता है। देश भर में एक साथ एक विशिष्ट रमें रात में होने वाले होलिका दहन, इस सर्दी और गर्मी की ऋतु-संधि में फूटने वाले मलेरिया, वायरल, फ्लू आदि तथा अनेक संक्रामक रोग- कीटाणुओं के विरुद्ध यह एक धार्मिक सामूहिक अभियान है। समस्याओं के लिए कर सकते हैं कुछ विशेष उपाय होली व दीवाली ऐसे विशेष अवसर हैं जब हर प्रकार की साधनाएं तथा छोटे- छोटे उपाय सार्थ...