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Showing posts from March, 2022

होलिका दहन अन्य भुज टोटके

'होलिका दहन मुहूर्त' 17 मार्च को 18:33 से 20:58 'होलिका' में दहन करें अपने कष्ट होली के आयोजन में अग्नि प्रज्ज्वलित कर वायुमंडल से संक्रामक कीटाणुओं को दूर करने का प्रयास होता है। इस दहन में वातावरण शुद्धि हेतु हवन सामग्री के अलावा गूलर की लकड़ी, गोबर के उपले, नारियल, अधपके अन्न आदि के अलावा बहुत- सी अन्य निरोधात्मक सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जिससे आने वाले रोगों के कीटाणु मर जाते हैं। जब लोग उच्च ताप वाली होलिका के गिर्द परिक्रमा करते हैं तो उनमें रोगोत्पादक जीवाणुओं को समाप्त करने की प्रतिरोधात्मक क्षमता में वृद्धि होती है और वे कई रोगों से बच जाते है। ऐसी दूरदृष्टि भारत के हर पर्व में विद्यमान है जिसे समझने और समझाने की आवश्यकता है। देश भर में एक साथ एक विशिष्ट रमें रात में होने वाले होलिका दहन, इस सर्दी और गर्मी की ऋतु-संधि में फूटने वाले मलेरिया, वायरल, फ्लू आदि तथा अनेक संक्रामक रोग- कीटाणुओं के विरुद्ध यह एक धार्मिक सामूहिक अभियान है। समस्याओं के लिए कर सकते हैं कुछ विशेष उपाय होली व दीवाली ऐसे विशेष अवसर हैं जब हर प्रकार की साधनाएं तथा छोटे- छोटे उपाय सार्थ...

कथा नल दमयंती || 06. || प्रजा भलाई के काम देखना व उससे संबंधित कार्य के लिए निदेश देना।

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कथा नल दमयंती || 06. || प्रजा भलाई के काम देखना व उससे संबंधित कार्य के लिए निदेश देना। राजा घोडे की सवारी करते हुए अपने राज्य के एक बहुत ही सुन्दर वन में जा पहुंचते हैं। वहां तरह-तरह के पक्षियों की आवाज सुनकर मुग्ध हो गए। इसी समय वे एक पक्षी को प्यास से व्याकुल होकर एक वृक्ष से नीचे गिरते हुए देखते हैं ।  वे उसे जल पिलाते हैं। उसे जीवन मिल जाता है और वह उड़ जाता है। राजा को बहुत खुशी महसूस होती है।  वे अपने सेनापति को पक्षी के गिरने का कारण जानने को कहते है। नल - सेनापति जाओ और इस पक्षी के मूर्छित होकर गिरने का कारण पता लगाओ।  सेनापति - महाराज पास के राज्य में सूखा पड़ा है। पक्षियों के लिए सीमा नहीं होती इसलिए वे कहीं भी चले जाते हैं। सूखे से व्याकुल होने के कारण पड़ोसी राज्यों के पक्षी हमारे राज्य में आ गए हैं। नल -  तो शायद उस राज्य के लोग भी बेहाल होंगे। वहां के राजा के सहायता के आग्रह भेजो। उनसे कहो कि हम इस विपत्ति की घड़ी में उनकी सहायता करना चाहते है। सेनापति - जी महाराज ! सूचना भिजवा दी जाएगी। नल - कल ही उस राज्य से सटी सीमा पर तालाब खुदवाने और...

कथा नल दमयंती || 102. || राजा भीम को संतान प्राप्ति का वरदान

कथा नल दमयंती || 102. || राजा भीम को संतान प्राप्ति का वरदान विदर्भ नरेश भीम बेचैनी से चहल कदमी करते हुए सोच रहें कि भीम → काश ! हमारे कोई संतान होती । निसंतान रहना भी कितना कष्टकारी होता है।  (तभी दमन ऋषि का प्रवेश होता है।)  दरबारी →   महर्षि दमन दरबार में पधार रहे हैं। राजा भीम → (राजा, सम्मान में खड़ा हो जाता है। उन्हें सामने देखकर दंड़वत प्रणाम करता है। ) महर्षि ! मेरा प्रणाम स्वीकार करें। मेरा अहोभाग्य कि आपके दर्शन हुए। अब मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे दुख जल्दी मिट जाएंगे। दमनऋषि →  उठोगे राजन ! तुम्हारा स्थान, यह नहीं उस सिंहासन पर है। बिना राजा के सिंहासन, का कोई महत्व नही होता। आप चले और उस पर बिराजमान होकर प्रजा के कष्टों को दूर करें। हे राजन ! परमेश्वर आपके काष्ट अवश्य दूर करेगा। राजा भीम →  जैसी आपकी आज्ञा, ऋषिवर ! परन्तु कुछदिन सेवा का अवसर दें। दमन ऋषि → ठीक है राजन !  हम एक मास आपके राज्य में ठहरेंगे। पर हम मात्रशक्ति का सम्मान करते हैं। कृपया उन्हें हमारी सेवा से दूर ही रखें। आप समझ गए न राजन। राजा भीम →  समझ गया महर्षि । आपकी से...

कथा नल दमयंती || 05. || राजा नल के राज दरबार का दृश्य

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कथा नल दमयंती || 05. || राजा नल के राज दरबार का दृश्य निषध देश के राजा बहुत गुणवान, परम सत्यवादी, वेदो के ज्ञाता, इंद्रियोको वश में रखने वाले, वीर, योद्धा, उदार, अस्त्र-शस्त्र में निपुण, प्रबल पराक्रमी, ब्राह्मण भक्त, सबके प्रिय, प्रजाहित चाहने वाले तथा दानशील आदगुणों से भरे हुए थे। उनके अंदर के गुणों का बखान करना बहुत कठिन था। इतने सारे गुण होने के बाद भी चौसर खेलने के एक मात्र दुर्गुण ने उन्हें विश्व का सबसे दुखी व मन्दभाग्य राजा बना दिया था। राजा नल का सभा में प्रवेश  घोषणा → परम सत्यवादी, गुणवान, वेदो के ज्ञाता, वीर, योद्धा, अस्त्र-शस्त्र में निपुण, ब्राह्मण भक्त, प्रजाहित चाहने वाले, दानशील और सबके प्रिय निषेध शिरोमणि राजा नल के राजसभा में आ रहे है। सभी उनके सम्मान मे खड़े होकर स्वागत करते है। राजा शान में मस्त हाथी की तरह राजसभा में प्रवेश करते हैं। वे एक नजर पूरी सभा पर डालते हैं और सबको बैठने का इशारा करके स्वयं सिंहासन पर बैठ जाते हैं। राजा नल  → प्रजा मे यदि किसी को कोई कष्ट है तो हमारे समछ उपस्थित होकर अपनी परेशानी हमे बता सकता है। (सभी शांत रहते हैं। रा...