कथासरित्सागर में नल और दमयन्ती की कथा
कथासरित्सागर में नल और दमयन्ती की कथा मैं इस सम्बन्ध में तुझे एक कथा सुनाता हूँ, सुनो। प्राचीन काल में नल नाम का एक राजा था ॥२३७।। वह राजा इतना सुन्दर था कि उसके रूप से अपमानित होकर कामदेव, मानों (उसी दुःस्ल से) क्रूज़ शिवजी के नेत्र की आग में जलकर भस्म हो गया ।॥२३८॥ पत्नी-रहित उस राजा ने, अपने ही समान सुन्दरी पत्नी की खोज करते हुए विदर्भ देश के राजा भीम की कन्या दमयन्ती का नाम सुना ॥२३९॥ सारी पृथ्वी पर ढूंढ़ते हुए राजा भीम को भी राजा नल के सिवा अपनी कन्या के योग्य दूसरा पति नहीं मिला ॥ २४०॥ इसी बीच एक बार राजा भीम की कन्या दमयन्ती जलक्रीडा के लिए एक तालाब में उतरी ॥२४१॥ उस सरोवर में उसने, कमल की नाल को खाते हुए एक राजहंस को युक्ति से अपनी चादर फेंककर पकड़ लिया ॥२४२॥ उससे इस प्रकार पकड़ा गया वह दिव्य राजहंस, मनुष्यों की वाणी में उससे कहने लगा-'हे राजकुमारी, मैं तेरा उपकार करूंगा। मुझे छोड़ दे। निषच देश का राजा नल है। अच्छे गुणों से गूंचे हुए हार के समान जिसे दिव्य रमणियाँ भी हृदय में धारण करती हैं ॥२४३-२४४॥ तू उसके समान पत्नी है और वह तेरे समान पति है। अतः, यह समान पति-पत्नी-संयोग ...