Posts

Showing posts from December, 2025

008. नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर

नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर प्रस्तावना भारतवर्षमें 'नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर प्रसिद्ध है। यह कथा स्त्री और पुरुप दोनोंहीके लिये अनेक अमूल्य उपदेशोंसे भरी है। किस प्रकार जुएके दुर्व्यसनने नल जैसे गुणवान् राजा-का सत्यानाश कर दिया, यह देखकर भला किसकी आँखें नहीं खुल जायेंगी और कौन नहीं दुर्व्यसनोंसे बचना साहेगा? एकही अवगुण कभी कभी सारे गुणों पर पानी फेर देता है, यह बात नलके चरित्रले स्पष्ट भालूम हो जाती है। इसी तरह दमयन्तीका चरित्र भो प्रत्येक नारीके लिये उज्ज्वल आदर्शका काम देता है। फिस प्रकार राजा की रानी होकर भी पतिके ऊपर विपत्ति ना पडने पर द‌मयन्तीने हँसते-हँसते दुख-कप्टोंका पहाड अपने सिरपर उठा लिया, यह देख फोन नारी शिक्षा नाहीं ग्रहण करेगी? जो ग्रहण करेगी, वह उसीकी तरह लाख दुख यातना उठाकर भी अन्तमें सुख पायेगी और जो नहीं ग्रहण करेगी, वह अपना लोक और पर लोक दोनोंही बिगाडेगी । नल-दमयन्ती ७ पहला परिच्छेद इस पुण्य-भूमि भारतवर्षके कोसल-प्रदेशमें इन्द्रको श्रम-रावती नगरीसे भी कहीं अधिक सुहावनी, सुख-समृद्धि-शालिनी और नाना प्रकारको मनोहर अट्टा-लिकाओंसे सुशोभित कोसला नामकी एक परम रमणीय...

007. संपूर्ण नल दमयंती की कथा || 10 भागों में ||

नल दमयंती की कथा। 🩵❤️💛🧡💚💙💜🤎🩷 भाग - 0 भूमिका  🩵❤️💛🧡💚💙💜🤎🩷 अर्जुन जब अस्त्र प्राप्त करने के लिये इन्द्रलोक चले गये, तब पाण्डव काम्यक वन में निवास कर रहे थे। वे राज्य के नाश और अर्जुन के वियोग से बड़े ही दुःखी हो रहे थे।  एक दिन की बात है, पाण्डव और द्रौपदी इसी सम्बन्ध में कुछ चर्चा कर रहे थे। धर्मराज युधिष्ठिर भीमसेन को समझा ही रहे थे कि महर्षि बृहदश्व उनके आश्रम में आते हुए दीख पड़े।  महर्षि बृहदश्व को आते देखकर धर्मराज युधिष्ठिर ने आगे जाकर शास्त्र विधि के अनुसार उनकी पूजा की, आसन पर बैठाया। उनके विश्राम कर लेने पर युधिष्ठिर उनसे अपना वृत्तान्त कहने लगे।  उन्होंने कहा कि ‘ महाराज !  कौरवो ने कपट – बुद्धि से मुझे बुलाकर छल के साथ जूआ खेला और मुझ अनजान को हराकर मेरा सर्वस्व छीन लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मेरी प्राणप्रिया द्रौपदी को घसीट कर भरी सभा में अपमानित किया।  उन्होंने अन्त में हमें काला मृगछाला ओढ़ाकर घोर वन में भेज दिया। महर्षे !  आप ही बतलाइये कि इस पृथ्वी पर मुझ – सा भाग्यहीन राजा और कौन है !  क्या आपने मेरे – जैसा दुःखी औ...

006. नल दमयंती की कहानी (नल दमयंती की कथा)।

नल दमयंती की कहानी (नल दमयंती की कथा)।  नल दमयंती की कहानी  : अर्जुन जब अस्त्र प्राप्त करने के लिये इन्द्रलोक चले गये , तब पाण्डव काम्यक वन में निवास कर रहे थे । वे राज्य के नाश और अर्जुन के वियोग से बड़े ही दुःखी हो रहे थे । एक दिन की बात है , पाण्डव और द्रौपदी इसी सम्बन्ध में कुछ चर्चा कर रहे थे । धर्मराज युधिष्ठिर भीमसेन को समझा ही रहे थे कि महर्षि बृहदश्व उनके आश्रम में आते हुए दीख पड़े । महर्षि बृहदश्व को आते देखकर धर्मराज युधिष्ठिर ने आगे जाकर शास्त्र विधि के अनुसार उनकी पूजा की , आसन पर बैठाया । उनके विश्राम कर लेने पर युधिष्ठिर उनसे अपना वृत्तान्त कहने लगे । उन्होंने कहा कि ‘ महाराज ! कौरवो ने कपट – बुद्धि से मुझे बुलाकर छल के साथ जूआ खेला और मुझ अनजान को हराकर मेरा सर्वस्व छीन लिया । इतना ही नहीं , उन्होंने मेरी प्राणप्रिया द्रौपदी को घसीटकर भरी सभा में अपमानित किया । उन्होंने अन्त में हमें काला मृगछाला ओढ़ाकर घोर वन में भेज दिया । महर्षे ! आप ही बतलाइये कि इस पृथ्वी पर मुझ – सा भाग्यहीन राजा और कौन है ! क्या आपने मेरे – जैसा दुःखी और कहीं देखा या सुना है ? ‘ महर्षि ब...