008. नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर
नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर प्रस्तावना भारतवर्षमें 'नल-दमयन्ती' की कथा घर-घर प्रसिद्ध है। यह कथा स्त्री और पुरुप दोनोंहीके लिये अनेक अमूल्य उपदेशोंसे भरी है। किस प्रकार जुएके दुर्व्यसनने नल जैसे गुणवान् राजा-का सत्यानाश कर दिया, यह देखकर भला किसकी आँखें नहीं खुल जायेंगी और कौन नहीं दुर्व्यसनोंसे बचना साहेगा? एकही अवगुण कभी कभी सारे गुणों पर पानी फेर देता है, यह बात नलके चरित्रले स्पष्ट भालूम हो जाती है। इसी तरह दमयन्तीका चरित्र भो प्रत्येक नारीके लिये उज्ज्वल आदर्शका काम देता है। फिस प्रकार राजा की रानी होकर भी पतिके ऊपर विपत्ति ना पडने पर दमयन्तीने हँसते-हँसते दुख-कप्टोंका पहाड अपने सिरपर उठा लिया, यह देख फोन नारी शिक्षा नाहीं ग्रहण करेगी? जो ग्रहण करेगी, वह उसीकी तरह लाख दुख यातना उठाकर भी अन्तमें सुख पायेगी और जो नहीं ग्रहण करेगी, वह अपना लोक और पर लोक दोनोंही बिगाडेगी । नल-दमयन्ती ७ पहला परिच्छेद इस पुण्य-भूमि भारतवर्षके कोसल-प्रदेशमें इन्द्रको श्रम-रावती नगरीसे भी कहीं अधिक सुहावनी, सुख-समृद्धि-शालिनी और नाना प्रकारको मनोहर अट्टा-लिकाओंसे सुशोभित कोसला नामकी एक परम रमणीय...