नल दमयंती की संपूर्ण कथा
नल दमयंती की संपूर्ण कथा। नल-दमयन्ती' की कहानी हमारे इतिहासपुराण की अमर कथाओं में से एक है। यह कथा जहां आदर्श पतिव्रत और पत्नीव्रत की कहानी सुनकर सुख दुख में डुबकी लगाते हुए आगे बढ़ती है वहीं यह कथा है, जुए के भयंकर परिणाम की ओर भी इशारा करती है। यह कथा इस बात का संदेश देती है कि बुरी आदतें मानव को अपने पंजे में जकड़कर बुरे कार्यों के लिए किस प्रकार से विवश कर देती हैं। यह कहानी बताते हैं कि जब यह जुआ राजा को भी भिखारी बना देता है तो तुच्छ से या साधारण मानव की तो बात ही क्या है। चलिए अब आते हैं अपनी बात पर और सुनाते हैं आपको नल दमयंती की कहानी। 🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺 अर्जुन जब अस्त्र प्राप्त करने के लिये इन्द्रलोक चले गये, तब पाण्डव काम्यक वन में निवास कर रहे थे। वे राज्य के नाश और अर्जुन के वियोग से बड़े ही दुःखी हो रहे थे। एक दिन की बात है, पाण्डव और द्रौपदी इसी सम्बन्ध में कुछ चर्चा कर रहे थे । अपमान की आग से जलते भीमसेन ने एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर से कहा, "भैया ! आपके जुआ खेलने की बुरी लत के कारण, हम लोग पुरुषार्थी होकर भी दीन-हीन हो गए ह...