कथा नल दमयंती || 06. || प्रजा भलाई के काम देखना व उससे संबंधित कार्य के लिए निदेश देना।

कथा नल दमयंती || 06. || प्रजा भलाई के काम देखना व उससे संबंधित कार्य के लिए निदेश देना।
राजा घोडे की सवारी करते हुए अपने राज्य के एक बहुत ही सुन्दर वन में जा पहुंचते हैं। वहां तरह-तरह के पक्षियों की आवाज सुनकर मुग्ध हो गए। इसी समय वे एक पक्षी को प्यास से व्याकुल होकर एक वृक्ष से नीचे गिरते हुए देखते हैं । 
वे उसे जल पिलाते हैं। उसे जीवन मिल जाता है और वह उड़ जाता है। राजा को बहुत खुशी महसूस होती है।  वे अपने सेनापति को पक्षी के गिरने का कारण जानने को कहते है।

नल - सेनापति जाओ और इस पक्षी के मूर्छित होकर गिरने का कारण पता लगाओ। 

सेनापति - महाराज पास के राज्य में सूखा पड़ा है। पक्षियों के लिए सीमा नहीं होती इसलिए वे कहीं भी चले जाते हैं। सूखे से व्याकुल होने के कारण पड़ोसी राज्यों के पक्षी हमारे राज्य में आ गए हैं।

नल - तो शायद उस राज्य के लोग भी बेहाल होंगे। वहां के राजा के सहायता के आग्रह भेजो। उनसे कहो कि हम इस विपत्ति की घड़ी में उनकी सहायता करना चाहते है।

सेनापति - जी महाराज ! सूचना भिजवा दी जाएगी।

नल - कल ही उस राज्य से सटी सीमा पर तालाब खुदवाने और उद्यान लगवाने की घोषणा की जाए। जो लोग इसमे सहायता करेंगे हम स्वयं उनके घर जाकर भोजन ग्रहण करेंगे।

[यह बात पूरे निषध राज्य मे आग की तरह फैल गई। प्रजा में सभी राजा के बहुत चाहते थे। उन्होंने स्वयं श्रमदान करने का निर्णय लिया।]

नागरिक 1-  मैं कल से ही अपनी सेवा महारज को समर्पित कर दुंगा।

नागरिक 2 - महाराज भला हमारे घर भोजन कैसे कर सकते हैं। वह तो सोने चांदी के बर्तन में भोजन करते हैं।

नागरिक 3 - अगर महाराज ने कहा है तो वे अवश्य भोजन करेगे। मुझे इसमें जरा भी संशय नहीं है और आपको भी नहीं होना चाहिए। दिन निकलने से पहले ही सभी लोग और सैनिक काम में जुट जाते हैं। पड़ोसी राजा ने भी सहायता स्वीकार कर ली और कुछ ही दिनों में वहां से अकाल दूर कर दिया गया।

[नल के पास पड़ोसी राज्य का दूत आता है]

दूत -  सूचना देता है राजा को धन्यवाद देता है कि आपकी सहायता से राज्य का काल दूर हो गया है आज से आप मेरे सच्चे मित्र हो गए आपको जब भी मेरी सहायता की आवश्यकता हो मुझे सूचित करना मैं सेवा में उपस्थित हो जाऊंगा।

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