कथा नल दमयंती || 00. || प्रस्तावना
नल और दमयंती संपूर्ण कथा || 00. भूमिका
भूमिका
पुराणों के साथ-साथ रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में नल दमयंती की कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है।
लेकिन बाद में अनेक ग्रंथ लिखे गए जिनमें *नल चंपू*, *नैषधीयचरितम्* आदि प्रमुुुख ग्रंथ है। ये संस्कृत काव्य और गद्य दोनों के मिश्रित रूप में है। इनमें नल दमयंती की कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है।
नल दमयंती की कथा का वर्णन जैन ग्रंथों में भी मिलता है हम उन्हें सभी का अध्ययन करने के उपरांत यह कथा एक के बाद एक सिलसिलेवार जोड़कर आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं क्योंकि बहुत से स्थानों पर इसका पूरा वर्णन नहीं मिलता है।
मेरा यह मनोरथ बहुत दिनों से था कि महात्मा राजा नल और दमयंती के जीवन-वृत्तांत का सर्वकल्याण के लिए वर्णन किया जाए, विशेष रूप से उस विपत्ति-काल का, जिसका उल्लेख हमें महाभारत के वनपर्व में मिलता है। यह कथा मूलतः संस्कृत भाषा में है। परमेश्वर की कृपा से मेरा यह उद्देश्य पूर्ण हुआ।
राजा नल और दमयंती का यह वृत्तांत पहले भी विभिन्न समयों पर और अनेक रूपों में प्रकाशित हो चुका है, परंतु मैंने महाभारत के वनपर्व में वर्णित कथा के अनुसार इसका यथासंभव सत्य और शुद्ध अनुवाद आर्य भाषा से सरल हिन्दी में करने का प्रयास किया है।
महाभारत के वनपर्व में वर्णित इस कथा को जो पाठक या श्रोता महाराज नल और दमयंती के इस प्रेमपूर्ण चरित्र का पाठ करेंगे या श्रवण करेंगे, उन्हें कलियुग की बाधा नहीं होगी—ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है। फिर भी, सज्जनों से विनम्र निवेदन है कि यदि इस ग्रंथ में कहीं कोई भूल या त्रुटि रह गई हो, तो कृपया उसे शुद्ध करें या मुझे उस भूल से अवगत कराएँ।
इस वृत्तांत के अध्ययन से शोक और हर्ष—दोनों भाव उत्पन्न होंगे तथा महात्मा नल के सत्य, धैर्य और धर्म में अडिग रहने का स्वरूप भली-भांति समझ में आएगा।
इसलिए पाठकों से आग्रह है कि आप इसे एक बार अवश्य पढ़ें अथवा सुनें।
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